दिनांक 20.08.26 को तुलसीदास पर हिंदी विभाग, गिरिडीह कॉलेज, गिरिडीह द्वारा एक विभागीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर हिंदी के अलग अलग समसत्रों के चालीस से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति रही। कई छात्र- छात्राओं ने तुलसीदास के सम्बन्ध में अपनी अपनी बातें भी साझा कीं। विद्यार्थियों में अनुराग सागर, साजन कुमार पाठक, राधा कुमारी, प्रिया कुमारी, मिशा कुमारी, पूजा कुमारी, तन्नू कुमारी, सतीश कुमार ने तुलसी के जीवन और साहित्य पर अपने विचार रखे। अनुराग सागर ने कहा कि तुलसीदास का साहित्य मानवीय भावों का साहित्य है। साजन कुमार पाठक ने रामचरित मानस की पंक्तियों को उद्धृत करते हुए तुलसी के लोकपक्ष की चर्चा की। उर्दू के सहायक प्रोफेसर डॉ गुलाम सामदानी ने तुलसी के साहित्य को सत्ता की चहादिवारी से बाहर लोकविमर्श का साहित्य बताया, साथ ही राजनीति विज्ञान के सहायक प्रोफेसर श्री राजकुमार वर्मा ने तुलसीदास की प्रासंगिकता की तरफ संकेत किया। हिंदी विभाग के अध्यक्ष डॉ बलभद्र ने उपस्थित सभी शिक्षकों तथा विद्यार्थियों को इस आयोजन में शामिल होने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि इस तरह के आयोजनों से हमारे विद्यार्थी अपनी सोच को अपनी भाषा देना सीखते हैं। बलभद्र ने तुलसीदास को उनके समय के अन्य कवियों के साथ पढ़ने की जरूरत को रेखांकित किया। कार्यक्रम का संचालन साजन कुमार पाठक ने किया।